आस्था:रुक्खड़ स्वामी मंदिर से लेकर देउर मंदिर तक धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर की संभावना
केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल और सांसद संतोष पांडे को लिखा पत्र, अब मिलकर करेंगे चर्चा
तपस्वी संत रुक्खड़ स्वामी के सिद्धपीठ से गंडई के देउर मंदिर तक धार्मिक पर्यटन कॉरीडोर की संभावना को देखते हुए पूर्व विधायक व संसदीय सचिव कोमल जंघेल ने खैरागढ़ विकास के लिए केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं सांसद संतोष पांडेय को पत्र लिखा है। उनसे व्यक्तिगत चर्चा भी की है। उन्होंने पत्र में बताया है कि छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव जिले के छुईखदान तहसील में चकनार ग्राम में मां नर्मदा पूरा इलाके के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र है। जहां पर एक प्राचीन नर्मदा मंदिर एवं कुंड स्थापित है। यहां पर प्रतिवर्ष माघी पूर्णिमा का मेला का आयोजन भी बहुत बड़े स्वरूप में होता है, जहां हजारों लोग दर्शन करने पूजा पाठ करने स्नान करने आते हैं। मेला तीन दिनों तक चलता है। यहां पर नर्मदा महोत्सव का भी आयोजन होता है, जिसमें छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम रात्रि में आयोजन होता, जिसमें प्रदेश के प्रसिद्ध लोक कलाकार सम्मिलित होते हैं और अपने कला का प्रदर्शन करते हैं। मां नर्मदा मंदिर राजनांदगांव जिले में स्थित है।
रोजगार की असीम संभावनाएं मां नर्मदा का इतिहास खैरागढ़ के श्री रुक्खड़ स्वामी शक्तिपीठ से भी जुड़ा है। तपस्वी संत श्री रुक्खड़ बाबा के भी सन् 1800 के आसपास यहां रहने के प्रमाण हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता रहता है। पीठ से ही लगा हुआ एशिया के पहले संगीत विश्वविद्यालय परिसर है। इस तरह खैरागढ़ से लेकर नर्मदा तक और उसके बाद गंडई तक एक पर्यटन कॉरिडोर का निर्माण किया जा सकता है। जिससे रोजगार की असीम संभावनाओं का जन्म होगा और पर्यटन के लिए सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। इससे पहले मध्यप्रदेश के सिवनी में लखनादौन के पास वन क्षेत्र को श्री रुक्खड़ वन ग्राम के नाम से जाना जाता है। इसका संबंध भी रुक्खड़ स्वामी मंदिर से होना ज्ञात हुआ है।
मूर्तियों का शिल्प वैभव बड़ा सुंदर नर्मदा से राजनादगांव, डोंगरगढ़, नागपुर, चंद्रपुर महाराष्ट्र, कान्हा किसली, बालाघट, शिवनी, मंडला, जबलपुर, मध्यप्रदेश, भोरमदेव कवर्धा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग-भिलाई के लिए सीधी मार्ग से जुड़ा हुआ है। नर्मदा मंदिर का पुरातात्विक महत्व है। नर्मदा का मंदिर लगभग तीन चार सौ साल पुराना प्रतीत होता है किन्तु यहां रखी प्रस्तर प्रतिमाएं कलचुरी कालीन 10वीं-11वीं ई. की हैं। इन मूर्तियों का शिल्प वैभव बड़ा सुंदर और कलात्मक है। इनमें प्रमुख गणेश, वीरभद्र, देवी नर्मदा बैकुंठधाम आदि प्रमुख हैं। अलंकृत नंदी की प्रतिमा, शिव लिंग व जलहरी भी यहां स्थापित है। नर्मदा मंदिर के शिखर पर जंघा भाग में मध्य कालीन कुछ मूर्तियां हैं। कच्छपावतार, मत्स्यवतार, नरसिंग अवतार का सुंदर अंकन है।
कोमल ने की थी नर्मदा महोत्सव की शुरुआत कोमल जंघेल 2007 से 2013 तक विधायक रहते हुए मां नर्मदा के विकास के लिए सतत प्रयास करते रहे उन्होंने ही पहली बार नर्मदा महोत्सव का शुरुआत किया, जिसे संस्कृति विभाग से इस कार्यक्रम को जोडऩे का काम किया और आज वह परम्परा आज भी चल रहा है। उस समय इस पावन स्थल पर साफ सफाई, मैदान समतलीकरण, नदी में पिचिंग, बाजार सेड, शौचालय निर्माण, जैसे अनेक कार्य करने की प्रयास किया था। कोमल जंघेल ने बताया कि यदि खैरागढ़ से नर्मदा और गंडई तक पर्यटन कॉरिडोर तैयार होता है, तो इससे पर्यटन आधारित रोजगारों का जन्म होगा। और क्षेत्र आत्मनिर्भर होगा। पूर्व विधायक कोमल जंघेल ने खैरागढ़ के श्री रुक्खड़ स्वामी मंदिर से नर्मदा मंदिर तक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने आवश्यक कार्यवाही करने का आग्रह किया है।
Robert John
January 13 2024Leverage agile frameworks to provide a robust synopsis for high level overviews. Iterative approaches to corporate strategy foster collaborative thinking to further the overall value proposition.
ReplyChristine Hill
December 27 2024Leverage agile frameworks to provide a robust synopsis for high level overviews. Iterative approaches
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